सात दिवसीय विशेष अभियान के तहत जिलेभर में करीब 25 हजार लोगों ने आयुष्मान कार्ड के लिए पंजीयन करवाए। इनमें से शुक्रवार तक 14 हजार 109 के आयुष्मान कार्ड बनकर भी आ गए थे। अब अभियान के बाद जिन पात्र लोगों को ये कार्ड बनवाने हैं वे लोक सेवा केंद्र, शासकीय अस्पताल व नगर निकायों में आवेदन कर सकते हैं।
खास बात यह है कि अभियान के बावजूद ज्यादा लोगों ने ये कार्ड बनवाने में रुचि नहीं दिखाई। ऐसे में आशंका है कि स्वास्थ्य विभाग आयुष्मान कार्ड को लेकर सही तरह से प्रचार-प्रसार नहीं कर पाया है। लिहाजा जरूरत इस बात की है कि विभिन्न माध्यमों के जरिए लोगों तक यह बात पहुंचाई जाए कि आयुष्मान कार्ड बनने से वे और उनके परिजन देशभर के शासकीय के अलावा चिह्नित निजी अस्पतालों में भी हर वर्ष पांच लाख रुपए तक का गंभीर बीमारियों का मुफ्त इलाज करवा सकते हैं।
जाहिर है कि वर्तमान में कोरोना महामारी के चलते हर परिवार की चिंता स्वास्थ्य को लेकर बनी है। यदि सही से लोगों तक कार्ड की उपयोगिता की बात पहुंचेगी तो वे उसे बनवाने में जरूर रुचि लेंगे। ऐसा प्रयास इसलिए भी जरूरी है कि जिलेभर में करीब 10 लाख लोग इस कार्ड की पात्रता रखते हैं लेकिन अब तक 5 लाख 25 हजार 246 कार्ड ही बने हैं। यानी करीब 50 फीसदी पात्र लोग अभी भी इस योजना से वंचित है।
11 निजी अस्पतालों में भी करवा सकते हैं इलाज
सीएमएचओ डॉ. महावीर खंडेलवाल ने बताया कि आयुष्मान कार्ड के जरिए जिले में इलाज करवाने के लिए पैनल में 11 निजी अस्पताल शामिल हैं। कार्डधारी व्यक्ति जिले के सरकारी अस्पतालों में तो इलाज करवा ही सकता है। इसके अलावा इन 11 निजी अस्पतालों में भी वह चिकित्सा सुविधा का लाभ ले सकता है। इनमें चेरिटेबल व आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज, तीन आई के सोराबाई, अपोलो व ऐरन हॉस्पिटल तथा हड्डी रोग के लिए चार और हार्ट के लिए सीएचएल हॉस्पिटल शामिल है।
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