प्रदेश के अतिक्रमणों व अवैध निर्माणों को कोरोना काल में न हटाए जाने की मिली मोहलत 21 दिन बाद समाप्त हो जाएगी। इस बीच जर्जर मकान आदि स्वयं के खर्च पर तोड़े जा सकते हैं। इसके बाद रोक हटेगी और संबंधिक विभाग अपने स्तर पर कार्रवाई के लिए स्वतंत्र होंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर अतिक्रमणों पर कार्रवाई के संबंध में जारी किए गए अपने पूर्व आदेश में एक बार पुन: संशोधन कर दिया है।मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने 10 मार्च तक प्रभावी सभी स्थगन व अंतरिम आदेशों को अब 21 दिन के लिए और बढ़ा दिया है।इस अवधि के बाद पूर्व में लगाई गई रोक स्वमेव समाप्त हो जाएगी।
इसके पूर्व 15 जुलाई और उसके बाद 25 अगस्त को कोर्ट ने राज्य सरकार को यह छूट दी थी कि नर्मदा के प्रतिबन्धित दायरे में कट ऑफ डेट के बाद किये गए निर्माण हटाए जा सकते हैं। साथ ही बैंकों व वित्तीय संस्थानों को भी मार्च 2020 से पूर्व जब्त सम्पत्ति या वाहन की नीलामी की छूट दी थी।
उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण व लॉकडाउन को देखते हुए 23 अप्रैल को कोर्ट ने कहा था कि 15 जून तक प्रशासन तोड़फोड़ नहीं कर सकेगा। मकान,दुकान खाली नहीं कराए जा सकेंगे। बैंक अपने ऋण की कसूली के लिए संपत्तियों को नीलाम नही करेगी। कोर्ट ने 15 जून को यह अवधि एक माह के लिए बढ़ा दी थी। 15 जुलाई को फिर एक बार यह अवधि 25 अगस्त तक की गई थी। बुधवार को कोर्ट ने 21 दिन के लिए यह अवधि और बढ़ा दी है।
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