लंबे इंतजार के बाद मप्र में फायर एक्ट लागू होने के आसार बन रहे हैं। केंद्र की गाइडलाइन पर तैयार हुए मप्र फायर एक्ट के मसौदे में 9 मीटर (सामान्य भाषा में जी प्लस 2) भवन के लिए भी फायर एनओसी जरूरी किए जाने का प्रावधान किया गया है। अब तक 15 मीटर ऊंचे भवन के लिए ही ऐसी एनओसी जरूरी है।
मप्र में ज्यादातर दुर्घटनाएं 9 मीटर ऊंचे भवनों में हुईं हैं। इसलिए फायर एनओसी के लिए 15 मीटर की लिमिट को घटाकर 9 मीटर किया जा रहा है। फायर एनओसी की समय सीमा को 30 दिन से घटाकर 15 दिन करने का भी प्रावधान एक्ट में किया जा रहा है। केंद्र सरकार के मॉडल अधिनियम के आधार पर स्कूल ऑफ गुड गवर्नेंस ने मसौदा तैयार किया है।
ये हैं महत्वपूर्ण प्रावधान
- 9 मीटर ऊंचे भवनों को लेना होगी फायर एनओसी
- काॅलोनियों में भी अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव के लिए प्रावधान करना होंगे
- पुराने भवनों का भी फायर ऑडिट कराना होगा
- अग्नि सुरक्षा उपायों की अवेहलना करने पर 10 हजार रुपए तक का जुर्माना
- राज्य स्तर पर फायर संचालनालय गठित किया जाए।
क्यों पड़ी जरूरत
किसी भवन या मार्केट में आग लगने पर अक्सर फायर अमले को आग से बचाव के साधन या तो मिलते नहीं और मिलते हैं तो वो चालू हालत में नहीं होते। ऐसी स्थितियों में नगर निगम नोटिस देकर रह जाता है।
हमने राज्य शासन को भेजा है मसौदा
हमने मप्र की फायर दुर्घटनाओं और अन्य स्थितियों का अध्ययन करके केंद्र सरकार के मॉडल एक्ट के आधार पर मसौदा बना कर राज्य शासन को भेजा है। कैबिनेट और उसके बाद विधानसभा की मंजूरी के बाद यह कानून लागू हो सकेगा।
- अंशुल पुरिया, कंसलटेंट, स्कूल ऑफ गुड गवर्नेंस
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