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शिवाजी अस्पताल पर छापा, डॉक्टर मिले न मरीज, बगैर कार्रवाई लौट गई स्वास्थ्य विभाग की टीम

जिला अस्पताल मार्ग पर छाेटे तालाब के सामने स्थित शिवाजी अस्पताल काे अवैध रूप से संचालित करने की शिकायत के बाद सीएमएचओ डाॅ. एमएस सागर से की गई थी। डाॅ. सागर ने एक दल गठित कर अस्पताल के खिलाफ शिकायत की जांच करने पहुंची थी। छापामार कार्रवाई की तर्ज पर किए गए औचक निरीक्षण में काेई खास खामी और गड़बड़ी ताे नहीं मिली, लेकिन जिन डाॅ. पीएस राजपूत के नाम पर अस्पताल रजिस्टर्ड है वे कई दिनाें से यहां आ नहीं रहे हैं। हालांकि बीएचएमएस डाॅ. पुष्पेंद्र सिंह ठाकुर अस्पताल के डायरेक्टर हैं। अस्पताल में मरीज भी नहीं मिले।

सागर के संचित नारायण शुक्ला ने 23 अक्टूबर काे सीएमएचओ काे एक लिखित शिकायत दी थी, इसमें कहा गया था कि शिवाजी अस्पताल में बीएचएमएस डाॅ. पुष्पेंद्र सिंह ठाकुर खुद काे डायरेक्टर बताकर अस्पताल संचालित कर रहे हैं। यह खुद बीएचएमएस के स्टूडेंट हैं। ये बड़ी-बड़ी बीमारी का शर्तिया इलाज करने का माेटी रकम लेकर ठेका लेते हैं।

वहीं अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ की जगह जीएनएम से काम करा रहे हैं। डाॅ. ठाकुर द्वारा सीएम सहायता याेजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता निकलवाने के नाम पर भर्ती मरीजों काे झांसा देकर पैसाें की मांग करते हैं। इलाज के नाम पर मरीजाें की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। शिकायत के बाद सीएमएचओ डाॅ. एमएस सागर ने डाॅ. सुनील जैन काे बताैर प्रभारी नाेडल अधिकारी बनाकर जांच के निर्देश दिए थे।

शुक्रवार शाम काे डाॅ. सुनील जैन, नर्सिंग हाेम एक्ट के तहत अस्पताल पंजीयन शाखा प्रभारी अरुण प्रजापति की टीम शाम 4 बजे शिवाजी अस्पताल का अाैचक निरीक्षण करने पहुंची थी। यहां पर अस्पताल में बीएमसी के एक डाॅक्टर अपनी ही भांजी का चैकअप करते मिले। अस्पताल में काेई अन्य मरीज नहीं था।

अस्पताल के डायरेक्टर डाॅ. पुष्पेंद्र सिंह ठाकुर यहां मिले थे, हालांकि काेई मरीज का इलाज या परीक्षण करने वे नहीं मिले। टीम ने अस्पताल के पंजीयन, गायनी यूनिट, मेडिसिन यूनिट सहित अन्य अनिवार्यताओं काे बारीकी से देखा तथा दस्तावेज
तलब किए थे। अस्पताल का बीते साल रजिस्ट्रेशन कराया गया था, जाे साल 2022 तक वैध है।

शिकायत के बाद जांच के निर्देश मिले थे

जांच टीम के नाेडल अधिकारी, डाॅ. सुनील जैन ने बताया कि शिवाजी अस्पताल काे अवैध तरीके से संचालित करने की सीएमएचओ से शिकायत की गई थी। उन्हाेंने अस्पताल का निरीक्षण कर जांच के निर्देश दिए थे। अस्पताल में औचक निरीक्षण किया गया है।

रजिस्ट्रेशन डाॅ. पीएस राजपूत के नाम पर है, वे नहीं मिले

शिवाजी अस्पताल का रजिस्ट्रेशन मकरोनिया में रहने वाले डाॅ. पीएस राजपूत के नाम पर है। वे एमबीबीएस डॉक्टर हैं। लेकिन वे अस्पताल में मौजूद नहीं थे। इस मामले में पूछताछ की ताे पता चला कि वे कई दिनाें से अस्पताल नहीं आए हैं। जबकि अस्पताल में बीएमसी सहित कई विजिटर्स डॉक्टर आकर ओपीडी और गायनी के तहत प्रसूता यूनिट में मरीजाें का इलाज, सीजर और सामान्य प्रसव कराते हैं। कुल मिलाकर यह अस्पताल विजिटर्स डाॅक्टर के भराेसे संचालित हाे रही है।



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शिवाजी अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दस्तावेजों की जांच की


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