शहर में 29 अगस्त काे नर्मदा में आई बाढ़ के कारण सर्किट हाउस घाट के पास बनी पिचिन का बड़ा हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हाे गया था। यह क्षतिग्रस्त हिस्सा अब तक नहीं सुधरा गया है। सबसे खास है कि वर्ष 1973 में नर्मदा में आई बाढ़ के समय भी सर्किट हाउस घाट के पास से पानी शहर में आया था इसलिए इसका सुधार जरूरी है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इधर जल संसाधन विभाग एसी एसके सक्सेना ने बताया कि सर्किट हाउस घाट के पास पिचिन की मरम्मत काे लेकर अब तक शासन की ओर से जवाब नहीं आया है। शासन से अनुमति मिलने के बाद ही आगे की कार्यवाही हाे पाएगी। हमने शासन काे प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है।
पूर्व नपाध्यक्ष ने लिखा पत्र
नर्मदा की बाढ़ के प्रभाव काे राेकने के लिए पूर्व नपाध्यक्ष अखिलेश खंडेलवाल ने नगरीय प्रशासन मंत्री काे पत्र लिखकर बांद्राभान और घानावड़ व एसपीएम पुलिया और डाेंगरवाड़ा राेड पर पिचिन निर्माण की मांग की थी। मामले में शासन की ओर से जिला प्रशासन से जवाब मांगा गया है।
खंडेलवाल ने बताया कि उन्हाेंने यदि घानावड़ में पिचिन बनती है ताे मालाखेड़ी-बांद्राभान राेड पर पानी नहीं भरेगा। साथ ही एसपीएम पुलिया के पास बाढ़ का पानी राेके जाने से संजय नगर,महिमा नगर और ग्वालटाेली के क्षेत्र डूबने से बचाए जा सकेंगे।
यहां से शहर में आता है बाढ़ का पानी
शहर में नर्मदा का बैकवाॅटर भीलपुरा-बीटीआई क्षेत्र, एसपीएम पुलिया और डाेंगरवाड़ा राेड से आता है। वहीं आदमगढ़ क्षेत्र में नालाें का पानी एकत्र हाेने के कारण बाढ़ का प्रभाव बढ़ जाता है।
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