टीवी का भारत में चलन शुरू हुए 61 साल हाे गए हैं। छत पर एंटीना से चलने वाले ब्लैक एंड वाइट टेलीविजन अब इंटरनेट के सहारे चलने वाली स्मार्ट टीवी तक आ चुका है। तकनीक बदलती रहीं लेकिन नहीं बदला ताे टीवी के प्रति रुझान। आज भी घर के मुख्य कमरे की राैनक टीवी ही है।
रिचर्स के अनुसार टेलीविजन के 62 प्रतिशत दर्शक केवल महिलाएं हैं। केबल संचालक आयुष मिहानी बताते हैं कि अब टीवी पर चैनल के साथ इंटरनेट की सुविधा देने वाले कनेक्शन की डिमांड है।
माेबाइल फाेन की स्क्रीन पर भले ही चैनलाें के साॅफ्टवेयर उपलब्ध हैं, लेकिन बड़ी स्क्रीन पर अपनी रुचि के कार्यक्रम देखना पहली पसंद है। माेबाइल स्क्रीन की तरह ही अब टीवी भी स्मार्ट सेटअप बाॅक्स से संचालित हाे रही है।
ट्राई ने सख्त किए नियम: 2005 तक एनाेलाॅग सिस्टम में पारदर्शिता नहीं हाेने के कारण सरकार काे राजस्व का नुकसान हाेता था। ट्राई ने सेटअप बाॅक्स अनिवार्य किया ताे दर्शक काे कम खर्च में ज्यादा सुविधा मिली और राजस्व नुकसान भी कम हुआ तब नियम सख्त हुए।
अब इंटरनेट के साथ टीवी चैनल की सुविधा
ऑनलाइन हाे रहे समय में अब सेटअप बाॅक्स से केवल टीवी चैनल देखने की बजाए घर के लैंडलाइन फाेन, माेबाइल फाेन पर अनलिमिटेड डाटा सुविधा देने की सुविधा की मांग बढ़ी है।
और कुछ ऐसे भी जाे नहीं देखते टीवी
मनाेरमा अग्रवाल ने लाॅकडाउन के बाद से टीवी रिचार्ज नहीं किया है। 8 माह से वे अपने माेबाइल फाेन पर ही पसंद के सीरियल देख रही हैं।
हृदेश चाैबे ने टीवी स्क्रीन काे कंप्यूटर स्क्रीन बना लिया है। जब परिवार में टीवी देखने का प्राेग्राम बनता है तभी घर में टीवी डिस्प्ले हाेती है।
ऐसा रहा टीवी का सफर
- 1959 में भारत में टीवी आया। 1975 में भारत के केवल 7 बड़े शहराें में प्रसारण था। 1982 में भारत में कलर टीवी आया।
- 80 के दशक में एंटीना में बूस्टर लगाकर ही सिग्नल मिलने पर एक मात्र दूरदर्शन का प्रसारण देखा जाता था।
- 1996 में एनाेलाॅग तकनीक से 108 चैनल देखना संभव हुआ।
- 2005 में ऑप्टीकल फाइवर आया जिससे कम पैसाें में ज्यादा चैनल देखने की सुविधा मिली।
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