कोरोना संक्रमण के चलते जाम के दामों में गिरावट आई है। भाव नहीं मिलने से किसान परेशान है। दिल्ली के बड़े व्यापारी मान-मनुहार के बाद इसे 5 रुपए किलो में खरीद रहे हैं। इसमें भी 2 किलो तुड़वाई में लग रहे हैं। क्षेत्र में करीब 150 हैक्टेयर में इलाहाबाद सफेदा, बड़फाना, थाईपिक वीएन आदि क्वालिटी के जाम के बगीचे है। बगीचा लगाने के बाद 3 साल में पैदावार शुरू होती है। इन दिनों बगीचों में बहार आई हुई है लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते देश व प्रदेश की मंडियों में जाम की पूछपरख नहीं हो रही है। इस कारण इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। दो दिन से बादल छाने से फसल भी प्रभावित हो रही है।
किसान आशाराम वर्मा, लखन वर्मा, मुकेश वर्मा व कालूराम वर्मा ने बताया पहले 400 रुपए कैरेट के हिसाब से खरीदी हो रही थी। अब एक कैरेट जाम के 100 रुपए ही दिए जा रहे हैं। दिल्ली के व्यापारियों को मोबाइल लगाकर जाम खरीदी के लिए गुहार लगाना पड़ रहा है। 5 रुपए किलो के हिसाब से खरीदी की जा रही है। 2 रुपए किलो मजदूरों को तुड़वाई के देना पड़ रहे हैं। लाखों रुपए के बगीचे लेने वाले व्यापारियों को नुकसान हो रहा है। शासन को व्यापारियों को राहत देना चाहिए।
फूड प्रोसेसिंग की हो व्यवस्था
किसान महेंद्र, जयसिंह, लखन चौहान, आनंदराम आदि ने कहा- नर्मदा किनारे जाम की खेती बढ़ी है। इसे देखते हुए शासन को क्षेत्र में फूड प्रोसेसिंग यूनिट की व्यवस्था करना चाहिए ताकि स्थानीय स्तर पर जाम की खपत हो सके। क्षेत्र में ही पेस्ट व जूस तैयार होने से किसानों को फायदा मिल सकता है।
प्रस्ताव भेजा है
^फूड प्रोसेसिंग यूनिट के लिए प्रस्ताव भेजा है। जल्द स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। बगीचा लगाने वालों को प्रति हैक्टेयर 60 हजार रुपए सब्सिडी दी जाती है। पहली किस्त में 36 हजार और दूसरी व तीसरी किस्त में 12-12 हजार रुपए दिए जा रहे हैं।
जगदीश मुजाल्दा, उद्यानिकी अधिकारी
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