रबी सीजन की बुआई को लेकर किसान अपने खेतों को तैयार करने में जुटे हैं लेकिन साटक बांध की नहरों से पानी नहीं छोड़ने से बुआई से पहले खेतों में पानी नहीं चला पा रहे हैं। इस मांग को लेकर बुधवार को क्षेत्र के किसान अधिकारियों से मिले।
किसानाें ने कहा- नहरों में अब तक पानी नहीं छोड़ा गया है। यहां तक की बालसमुद, साटकुर आदि क्षेत्र में नहरों की सफाई भी नहीं हुई है। कई जगह से नहरें क्षतिग्रस्त है। कंटीली झाड़ियों व खरपरवार उग आई है। अब भी सफाई नहीं हुई तो बुआई में पिछड़ जाएंगे। इससे उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। एसडीओ ने नहर सफाई के लिए 48 प्रतिशत राशि ही मिली है। इसके बाद गुरुवार को किसान कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और राशि की मांग रखी। साटक बांध की नहरों से क्षेत्र के 17 गांव की 4000 हैक्टेयर जमीन सिंचित होती है लेकिन इस साल सफाई की राशि कम मिलने से 30 फीसदी नहरों की ही सफाई हो पाई है। सफाई के अभाव में 12 गांव के कई किसानों को सिंचाई का पानी नहीं मिलने की आशंका है।
दो साल से नहीं मिल रही सफाई की राशि, लोगों को नहीं मिल रहा पानी
साटक बांध संस्था के पूर्व अध्यक्ष गणेश पटेल ने बताया 2 साल से नहरों की सफाई के लिए कोई राशि नहीं मिली है। इस साल भी नाममात्र राशि मिलने से नहरों की सफाई नहीं हुई। कई किसानों ने खेत तैयार कर लिए हैं। पिछले साल पूर्व अध्यक्ष ने राशि खर्च कर सफाई करवाई थी। 67 हजार रुपए नहीं मिले हैं। अन्य तालाबों की तुलना में साटक बांध से लाभांवित किसानों से वसूली का प्रतिशत अच्छा है।
15 लोगों के बजाय दो चौकीदार व दो टाइमकीपर के भरोसे कार्यालय
साटक बांध का कमांड एरिया करीब 45 किलोमीटर का है लेकिन कार्यालयीन स्टाफ काफी कम है। बांध पर 10 चौकीदार, 2 अमीन व 3 टाइम कीपर होना चाहिए लेकिन यहां 2 चौकीदार व 2 टाइम कीपर के सहारे ही कार्यालय चल रहा है। जबकि हर साल प्रत्येक किसान से 100 रुपए प्रति एकड़ चौकीदार के नाम पर अलग से वसूले जाते हैं।
10 करोड़ खर्च के बाद सिंचाई को तरस रहे
पानी की बचत व अधिक जमीन सिंचित करने के उद्देश्य से 2013 में साटक बांध से जुड़ी नहरों का पक्का निर्माण किया। करीब 10 करोड़ रुपए लागत से 45 किमी की पक्की नहरें बनाई लेकिन गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखने से नहरें जवाब देने लगी है। वर्तमान में नहर कई जगह से क्षतिग्रस्त है। बड़ी दरारें हो चुकी है। किसान दिनेश पटेल, जितेंद्र पटेल, भुवानीराम पटेल व दिनेश प्रजापत ने कहा- पक्की नहर बनने के बाद बालसमुद क्षेत्र के किसानों को भी सिंचाई के लिए पानी मिलने की उम्मीद जागी थी लेकिन अब स्थिति देख यह संभव नहीं लग रहा है।
^जल उपभोक्ता संस्था को नहर सफाई के लिए हर साल 2 लाख 16 हजार मिलना चाहिए लेकिन इस साल 84 हजार 600 रुपए मिले हैं। शेष राशि के लिए प्राक्कलन बनाकर वरिष्ठ कार्यालय भेजा है। सफाई के पहले पानी छोड़ने पर अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पाएगा। प्रयास है बोवनी से पहले पानी छोड़ा जा सके।
एलएस सोलंकी, एसडीओ जल संसाधन विभाग
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