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जंगली सूअर का शिकार करने दाैड़ा भूखा बाघ कुएं में गिरा, डूबने से माैत

बाघ संरक्षित क्षेत्र रातापानी अभयारण्य में टाइगर असुरक्षित है। 2019 में टाइगर स्टेट का दर्जा हासिल कर चुके मप्र की राजधानी भाेपाल से 70 किमी दूर एक साल के बाघ की बुधवार रात काे निराशाजनक माैत हाे गई। रातापानी अभयारण्य का भूखा बाघ जंगली सूअर के शिकार के दाैरान बुदनी तहसील के डुंगरिया गांव के एक कुएं में गिर गया। पानी में डूबने से बाघ की माैत हाे गई। कुएं में मादा सूअर का शव भी मिला है।

एसडीओ फाॅरेस्ट बीपी सिंह, के मुताबिक डुंगरिया गांव में शब्बीर खान के कुएं में गिरने से बाघ की मौत हो गई है। शिकार के दाैरान वह कुएं में गिर गया। रातापानी अभयारण्य एसडीओ चक्रधर त्रिपाठी ने बताया रातापानी अभयारण्य में 50 से अधिक बाघ हैं। शिकार के लिए बाघ संरक्षित क्षेत्र से बाहर जाते हैं। रातापानी को टाइगर रिजर्व बनाने का प्रस्ताव भेजा है। स्वीकृति नहीं मिली है।

विडंबना: सीएम ने सतपुड़ा के जंगल में तैरते बाघ का वीडियो किया था पोस्ट, 4 दिन बाद उनके विधानसभा क्षेत्र में डूबा बाघ

होशंगाबाद। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 3 जनवरी को सतपुड़ा के जंगल में तैरते हुए बाघ का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। इधर, रातापानी के जंगल के करीब शाहगंज के डुंगरिया गांव में एक बाघ कुएं में डूबकर मर गया। बाघ का शव सुबह लोगों को दिखाई दिया।

गुरुवार को पाेस्टमार्टम के बाद बाघ का किया अंतिम संस्कार
वन विहार भाेपाल के पशु चिकित्सक डाॅ. अतुल गुप्ता, एसटीआर के पशु चिकित्सक डाॅ. गुरुदत्त शर्मा, डाॅ. अमित ओड, डाॅ. प्रशांत देशमुख ने बाघ के शव का पाेस्टमार्टम किया। सीसीएफ भाेपाल एके मिश्रा, डीएफओ सीहाेर रमेश गनवा की उपस्थिति में अंतिम संस्कार किया गया।

रातापानी अभयारण्य दायरे में 15 गांव, 2 नेशनल हाईवे, रेलवे लाइन
रातापानी अभयारण्य में 2014 में 20 बाघ थे, जो अब बढ़े हैं। रातापानी 907 वर्ग किमी का ही क्षेत्र है। इसमें से 2 नेशनल हाइवे, तीन स्टेट हाइवे और रेलवे लाइन निकली है। इसके अंदर 15 गांव भी है। रातापानी काे टाइगर रिजर्व बनाने का प्रस्ताव विचाराधीन है।

....इसलिए असुरक्षित रातापानी अभयारण्य

  • 22 मई 2015 : मिडघाट के भीमकाेठी में ट्रेन से कटकर बाघ की माैत।
  • 22 अप्रैल 2016 : बुदनी के पास वीरपुर रेंज में करंट लगाकर बाघ का शिकार।
  • 28 दिसंबर 2016 : गर्भवती बाघिन की मिडघाट में ट्रेन से कटकर माैत।
  • 1 अप्रैल 2017 : ट्रेन से कटकर बाघ की माैत।
  • 24 फरवरी 2017 : गडरिया नाले के पास भूख से बाघ की माैत हुई थी।

एक्सपर्ट व्यू- एल कृष्णमूर्ति, क्षेत्र संचालक सतपुड़ा टाइगर रिजर्व

बाघाें की सुरक्षा के लिए ये 3 इंतजाम
एसटीआर में करीब पांच से छह करोड़ रुपए बाघों सहित अन्य वन्यप्राणियों की सुरक्षा पर खर्च किए जाते हैं।

घास: मैदानी इलाके में बिना खरपतवार वाली घास उगाते हैं ताकि चीतल जैसे वन्यप्राणी आएं, जाे बाघ के शिकार हैं।

पानी : बाघ के काेर एरिया में ही पानी की पर्याप्त उपलब्धता हर माैसम में रखी जाती है।

सुरक्षा : बाघ के भ्रमण क्षेत्र में मनुष्याें की माैजूदगी न हाे इसकी लगातार माॅनीटरिंग की जाती है।



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रातापानी के जंगल के करीब शाहगंज के डुंगरिया गांव में एक बाघ कुएं में डूबकर मर गया। बाघ का शव सुबह लोगों को दिखाई दिया।


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