कलेक्टोरेट में 288 दिन बाद मंगलवार से जनसुनवाई दोबारा शुरू हुई। दो घंटे की जनसुनवाई में कलेक्टर के सभाकक्ष में सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा-पूरा ध्यान रखा गया। जो भी आवेदक आया उसके हाथ दो बार सैनिटाइज करवाए फिर अंदर जाने दिया, लेकिन बाहर बरामदे में टोकन व आवेदन नंबर के लिए भीड़ लगवाई गई।
व्यवस्था लड़खड़ाई सी नजर आई। कोविड-19 के चलते 22 मार्च 2020 से जिले में लॉकडाउन लग गया था। मंगलवार 24 मार्च से 29 दिसंबर यानी 288 दिन तक कलेक्टोरेट में 39 मंगलवार जनसुनवाई नहीं हुई। इस दौरान जनसुनवाई के लिए कलेक्टोरेट आए आवेदकों ने करीब 982 शिकायतें व आवेदन यहां रखी पेटी में डाले। 5 जनवरी 2021 मंगलवार को सुबह 11 बजे जनसुनवाई दोबारा शुरू हुई। काेविड-19 का पालन कराने के लिए केवल एक ही प्रवेश द्वार रखा गया।
अंदर जाने के अन्य दरवाजे बंद रखे गए। कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों को आवेदन देने के लिए पांच-पांच मिनट के अंतराल से आवेदकों को छोड़ा गया। जनसुनवाई में दोपहर 1.15 बजे तक 59 आवेदकों ने शिकायतें व आवेदन दिए।
छात्रा ने मांगी आर्थिक मदद, विकलांग ने घर
जनसुनवाई में अन्नपूर्णा पिता रामदास निवासी टाकलीमोरी ने कलेक्टर से आर्थिक मदद मांगी। उसने बताया वह बहुत गरीब है, लेकिन उसके परिवार का ना तो बीपीएल कार्ड बना है ना ही किसी योजना का लाभ मिला है। उसने कलेक्टर से आर्थिक मदद मांगी। दिव्यांग अशोक हिंडोन निवासी संजय नगर ने आवास योजना के लाभ का आवेदन दिया। जब वह आवेदन देकर लौट रहे थे तो एक ही द्वार हाेने व रैंप नहीं होने से उनका संतुलन बिगड़ गया और वे गिरते-गिरते बच गए। कतार में लगे कुछ आवेदकों ने उन्हें संभाल लिया। अशोक ने बताया वह पूर्व महापौर वीरसिंह हिंडोन का भतीजा है।
झोपड़ी तोड़ने का नोटिस, रो पड़े दंपती
गेंदालाल पिता बाबूलाल (70) व पत्नी कबीराबाई (65) निवासी खेड़ी आवेदन लेकर कलेक्टाेरेट आए और रो पड़े। दंपती ने बताया गांव के बाहर इंदिरा आवास की मद से झोपड़ी बनाकर 40 साल से रह रहे हैं। अब वहां सेतु निगम का पुल बन रहा है। जिसके लिए तहसीलदार ने अवैध कब्जे का नोटिस देकर हटाने कोे कहा।
रहिमापुर की आधा दर्जन महिलाओं ने गांव के लिए बिजली व पानी मांगा
कलेक्टोरेट पहुंची ग्राम रहिमापुर की आधा दर्जन से अधिक महिलाओं ने कलेक्टर को आवेदन देकर गांव में बिजली व पानी की मांग की। महिलाओं ने बताया मूलभूत सुविधाओं से गांव अब तक अछूता है। पानी व बिजली संबंधित कार्यों के लिए दूसरे गांव जाना पड़ता है।
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