एक हजार से ज्यादा डाॅक्टरों की सीनियरटी दरकिनार कर स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी द्वारा उनकी पत्नी डाॅ. नीरा चौधरी को संयुक्त संचालक बनाए जाने का मामला गरमा गया है। चौधरी ने शुक्रवार को सफाई दी है। उन्होंने कहा कि जो आरोप लगा रहे हैं वे स्वास्थ्य आयुक्त से बात करें। चौधरी ने कहा कि डाॅ. नीरा को संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं का प्रभार दिया है, वह काम चलाए जाने के लिए दिया गया है। उनका अभी प्रमोशन नहीं किया गया है। बस प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है। किसी को दरकिनार नहीं किया गया है। अभी तो प्रमोशन नहीं हो रहे हैं। काम भी नहीं रोका जा सकता।
स्वास्थ्य संचालनालय ने इस मामले के 4 जनवरी को जारी किए थे आदेश
दरअसल, स्वास्थ्य संचालनालय ने 4 जनवरी को आदेश जारी कर डाॅ. नीरा चौधरी को क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं में संयुक्त संचालक पद के प्रभार में पदस्थ किया था। आदेश में कहा गया था कि डाॅ. चौधरी जिला स्वास्थ्य अधिकारी का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण करते हुए संयुक्त संचालक के पद पर पदस्थ किया जाता है। इसके बाद यह मामला सामने आया था कि प्रशासकीय उच्च पदों का प्रभार उसी संवर्ग के अधिकारियों को दिया जा सकता है। यानी संयुक्त संचालक का प्रभार डिप्टी डायरेक्टर या उससे नीचे के पद वाले अफसर सीएमएचओ को ही दिया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी अंतिम वरिष्ठता सूची के अनुसार 1042 प्रथम श्रेणी अफसरों के नाम हैं, उनमें डाॅ.नीरा का नाम नहीं हैं।
डाॅ. नीरा को रिपोर्ट नहीं करेंगे सीएमएचओ : गोयल
स्वास्थ्य आयुक्त डाॅ. संजय गोयल का कहना है कि डाॅ.नीरा चौधरी की पोस्टिंग क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए संयुक्त संचालक प्रभार में की है। वे जिस स्केल में है उसके अनुसार उनकी पोस्टिंग की गई है। सीएमएचओ को उन्हें रिपोर्ट नहीं करना है। रही बात सुपरसीड की तो जो भी सीएमएचओ या डिप्टी डायरेक्टर बताएं कि उनकी पोस्टिंग ज्वाइंट डायरेक्टर के प्रभार में करनी है तो उन्हें पदस्थ कर दिया जाएगा।
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