ऑनलाइन क्लास में स्टूडेंट्स को विषयों को टीचर के प्रेजेंटेशन, वीडियाे या 3-डी इलस्ट्रेशन से समझना आसान जरूर रहा, लेकिन इसका प्रैक्टिकल करके देखना एक अलग ही अनुभव है। इसे किसी भी प्रेजेंटेशन से पाया नहीं जा सकता। बस.. इसी प्रैक्टिकल समझ को बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी है कि बच्चे स्कूल पहुंचें।
कुछ ऐसी ही वजहों के कारण स्कूल खुलने के पहले सप्ताह में ही 60 से 80 प्रतिशत तक बच्चे स्कूल पहुंचे। कुछ पेरेंट्स के साथ तो कुछ स्कूल ट्रांसपोर्ट से...। डीपीएस नीलबड़ में 10वीं-12वीं के 256 बच्चों में से 204 स्कूल पहुंच रहे हैं। पेरेंट्स और स्कूल आ रहे बच्चों का फीडबैक है कि फिजिकल पढ़ाई ऑनलाइन क्लास से 10 गुना बेहतर है।
स्टूडेंट्स का अनुभव: टीचर्स से फेस टू फेस इंटरेक्शन अहम
ऑनलाइन में डाउट क्लीयर नहीं हो पाते: सेंट जोसफ कोएड में 12वीं के स्टूडेंट रुद्रांश भारद्वाज कहते हैं- ऑनलाइन क्लासेस में पढ़ाई तो हो जाती थी, लेकिन डाउट क्लीयर नहीं हो पाते थे। अब, टीचर्स के साथ क्लास में फेस-टू-फेस इंटरेक्शन से सारे डाउट क्लीयर कर रहा हूं। ऑनलाइन क्लासेस का असर आंखों पर भी पढ़ा।
दो दिन की क्लास सालभर की ऑनलाइन स्टडी के बराबर : सेंट जेवियर्स स्कूल में 10वीं क्लास के स्टूडेंट फखरुद्ददीन खान कहते हैं, स्कूल खुलते ही डाउट क्लीयर करने के लिए सिर्फ दो दिन क्लासेस लगाई गईं। लेकिन, इन दो क्लासेस का इतना ज्यादा असर था, जितना सालभर की ऑनलाइन पढ़ाई में महसूस नहीं हुआ।
अब कॉन्फिडेंस बढ़ रहा है : आनंद विहार स्कूल में 12वीं की स्टूडेंट इशिका चौधरी ने बताया, पूरी क्लास 4 अलग-अलग हिस्सों में बांट दी गई है। क्लास में ज्यादा बच्चे नहीं होते और डिस्टेंसिंग मेंटेन हो रही है। स्कूल जाकर पढ़ाई करने से एग्जाम अच्छा जाने का कॉन्फिडेंस आ रहा है।
पेरेंट्स बोले- स्कूल जाने से दूर होता है बच्चों का अकेलापन
जब मार्केट, रेस्त्रां जा रहे तो स्कूल क्यों नहीं : 10वीं के छात्र विश्रुत की मां संस्मृति मिश्रा ने कहा कि बच्चे घर में रहकर परेशान हो रहे थे। मार्केट, रेस्त्रां व प्ले ग्राउंड तो जा ही रहे हैं, फिर स्कूल में दोस्तों से मिलेंगे तो मेंटल हेल्थ अच्छी ही होगी।
बच्चे अपने आप को सुरक्षित रखना भी सीखें : 10वीं की छात्रा अनुष्का की मां डॉ. मेघा जैन ने कहा कि हमारे ऑफिस वर्क में बिजी होने से बेटी अकेलापन महसूस कर रही थी। अब उसे सिखाने की भी जरूरत है कि खुद को सुरक्षित रख कैसे मूवमेंट बढ़ाई जाए।
एहतियात के बीच तो स्कूल भेजा जा सकता : 11वीं के आरुष की मां शीबा राजेश कहती हैं कि स्कूल में जगह-जगह पर सैनिटाइजर की व्यवस्था है। टीचर्स खुद तैनात हैं कि कोई भी स्टूडेंट डिस्टेंसिंग न तोड़े। इतने एहतियात के बीच तो स्कूल भेजा जा सकता है।
टीचर्स की राय- स्कूल में सब्जेक्ट्स की सही समझ मिलती है
ये पॉजिटिव साइन है
डीपीएस की प्रिंसिपल विनीता मलिक का कहना है कि 80% बच्चों का स्कूल पहुंचना और पेरेंट्स का उन्हें सपोर्ट करना पॉजिटिव साइन है। परीक्षा के तुरंत पहले बहुत जरूरी है कि बच्चों को सभी सब्जेक्ट्स फिर से समझने का मौका और टीचर का सीधा गाइडेंस मिले।
बच्चों का फीडबैक बेहतर
टीएसवीएस के शिखर सेक्शन के हेड डाॅ. दिलीप पांडा ने बताया कि फिलहाल 60% बच्चे स्कूल आ रहे हैं। यह संख्या बताती है कि बच्चे भी फिजिकल एजुकेशन को मिस कर रहे थे। स्कूल आ रहे 90% बच्चों का फीडबैक है कि फिजिकल पढ़ाई ऑनलाइन से 10 गुना बेहतर है।
कंसंट्रेशन बना रहता है
म्यूजिक टीचर बिंदु नंदकुमार ने बताया, ऑनलाइन क्लास में लगातार कंसंट्रेशन बनाकर पढ़ाई करना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन अब स्कूल ओपन हो गए है और ऑफलाइन क्लास में बच्चों का कंसंट्रेशन बना रहता है टीचर्स भी बराबर बच्चों को अटेंशन दे पाते हैं।
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