शहर के इमली चौराहा बस स्टैंड पर यात्रियों के लिए कोई सुविधा नहीं है। बस स्टैंड में यात्री प्रतीक्षालय, सुलभ कॉम्पलेक्स आदि नहीं होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। शहर में रोजाना 50 से अधिक बसों का आना जाना जाना होता है। इन बसों में रोजाना हजारों यात्रियों का आना-जाना होता है।
इमली चौराहा बस स्टैंड पर यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं नहीं है। बस स्टैंड पर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्ग यात्रियों को बैठने की सुविधा नहीं होने से यात्रियों को सड़क पर खड़े होकर या नीचे सड़क किनारे बैठकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। क्योंकि होटलों पर बैठकर बस का इंतजार करने में उन्हें मजबूरी में चाय पीना पड़ेगी या नाश्ता करना पड़ेगा।
बस स्टैंड पर नहीं है बैठने की सुविधा
वर्षो पुराने बस स्टैंड पर यात्रियों को बैठने की सुविधा भी नहीं है। यात्रियों को गर्मी, सर्दी और बारिश में सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। इससे छोटे-छोटे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाओं को भारी परेशानी होती है। बस स्टैंड पर सड़क के दोनों पर स्थित पुलियाओं पर चाय नाश्ते, अंडा, पान, सब्जी वालों ने अतिक्रमण कर पुलियाओं के ऊपर अपनी गुमठियां रख ली है। वहीं स्टेशन रोड की ओर वाली बची एक मात्र पुलिया पर नगर परिषद ने चलित पेशाब घर रख दिया। बस स्टैंड से रोजाना कंजिया, बीना, खिमलासा, मालिौन, खुरई, सागर, जबलपुर आदि के लिए बसों का आना-जाना लगा रहता है। मल्हारगढ़ रोड से मल्हारगढ़, बिल्हेरू, घाट बमुरिया, भोरासा, कुरवाई, मंउीबामोरी, गंज बासौदा, भोपाल आदि के लिए बसों के साथ अन्य वाहनों का आना जाना रहता है।
दोनों ओर बनी पुलिया पर हुआ अतिक्रमण
बस स्टैंड पर सड़क के दोनों और लोगों के बैठने के लिए पुलिया बनी हुई है। इन पुलिया पर चाय, पानी, फल, सब्जी, अंडे वालों ने अतिक्रमण पुलिया पर अपनी गुमठिया रख ली हैं। वहीं सड़क के दूसरी तरफ की पुलिया पर नगर परिषद ने एक चलित शौचालय रख दिया है। इससे पुलिया के आसपास दिन भर बदबू आती है। दुर्गंध के कारण इस पुलिया बैठना तो दूर की बात है। इसके पास से निकलने में भी बदबू कारण लोगों को भारी परेशानी होती है।
बस स्टैंड पर आती हैं रोजाना 50 से अधिक बसें
इमली चौराहा बस स्टैंड पर रोजाना 50 से अधिक बसों का आना-जाना होता है। बस स्टैंड से बीना, सागर, खुरई, खिमलासा, जबलपुर तक के वाहन यहां से जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ बिल्हेरू, मल्हारगढ़, घाट बमुरिया, मंडी बामोरा, कुरवाई, विदिशा भोपाल की बसों का आना-जाना होता है। कोरोना काल में ट्रेनों के बंद होने से बसों से ही लोगों का अधिक आनाजाना होता है।
बस स्टैंड में नहीं है पेयजल की व्यवस्था
बस स्टैंड पर सुविधाघर की सुविधा नहीं है। ऐसे में महिला यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पुरुष यात्री तो इधर-उधर घूम कर कहीं भी बाथरूम कर लेते हैं लेकिन महिला यात्रियों को भारी परेशानी होती है। बस स्टैंड पर पेयजल की सुविधा नहीं होने से यात्रियों को पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। गर्मियों के मौसम में यात्रियों को होटलों से पानी खरीदकर पीना पड़ता है। महिला और छोटे-छोटे बच्चों को प्यास लगने पर हैंडपंप का सहारा लेना पड़ता है।
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from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2JNAbEh January 06, 2021 at 05:18AM https://ift.tt/1PKwoAf



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