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5 दिन बाद कुंभ; 14 जनवरी को पहला प्रमुख स्नान, गायत्री परिवार घर-घर पहुंचाएगा गंगाजल

अगले 5 दिन बाद हरिद्वार में कुंभ की शुरुआत हाेगी। मकर संक्रांति पर 14 जनवरी काे पहला प्रमुख स्नान हाेगा। इस बार हरिद्वार का कुंभ 12 साल की बजाय ग्यारहवें साल में हाेने जा रहा है। खास बात यह है कि हरिद्वार में 2021 में हाे रहा यह कुंभ 12 साल की बजाय 11 साल में हाेने जा रहा है।

साैरमंडल में पृथ्वी और बृहस्पति की चाल में हाेने वाले अंतराल के कारण कुंभ के आयाेजन में हर आठवें साल में 1 साल का समय कम हाे जाता है। इसके कारण हर आठवां कुंभ 11 साल के अंतर में हाेता है। इस संबंध में खगाेल शास्त्रियाें और ज्याेतिषशास्त्रियाें के अपने-अपने मत हैं। काेराेना संक्रमण काे देखते हुए इस बार गायत्री परिवार हरिद्वार के सदस्याें ने घर-घर गंगा पहुंचाकर कुंभ का पुण्यलाभ श्रद्धालुओं तक पहुंचाने की तैयारी की है।

गुरु और सूर्य की स्थिति से तय हाेता है कुंभ का समय

हरिद्वार
गुरु कुंभ राशि में और सूर्य मेष राशि में हाेता है तब 12 साल में एक बार हरिद्वार में कुंभ का आयाेजन हाेता है।

प्रयाग
गुरु कुंभ राशि में और सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है तब कुंभ मेले का आयोजन प्रयाग में किया जाता है।

नासिक
गुरु सिंह राशि में और सूर्य कर्क राशि में हाेता है तब गोदावरी के तट पर नासिक में कुंभ होता है।

उज्जैन
गुरु सिंह राशि में और सूर्य मेष राशि में हाेता है तब उज्जैन में कुंभ हाेता है इसे सिंहस्थ कहते हैं।

बृहस्पति 12 साल में परिक्रमा पूरी करता : राजेश पाराशर खगाेलविद
बृहस्पति 12 साल अपनी परिक्रमा पूरी करता है। सूर्य और बृहस्पति के 12 राशियाें में समय- समय पर प्रवेश के अनुसार कुंभ के आयाेजन निर्धारित हैं। चार निर्धारित तीर्थाें पर 12 साल में एक बार और तीन साल में एक बार कुंभ तय किया गया।

सूर्य-गुरु की वर्तमान स्थिति तय करती है कुंभ : साेमेश परसाई, ज्याेतिषाचार्य
मान्यतानुसार समुद्रमंथन हुआ जाे वर्तमान के 12 वर्ष के बराबर है। समुद्रमंथन से अमृतकलश निकला। तब से अभी तक गंगा, गाेदावरी और शिप्रा नदियाें के तटाें पर सूर्य और बृहस्पति की विशेष स्थतियाें के अनुसार कुंभ हाेता है।

इसलिए बृहस्पति और सूर्य की गति से हाेती है कालगणना

  • साैर मंडल में सूर्य प्रमुख है। क्रमानुसार ओर बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, गुरु, शनि, यूरेनस और नेप्च्यून गृह परिक्रमा करते हैं।
  • परिक्रमा करते गृह साैर मंडल में स्थित तारामंडल मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ, मीन से बारी बारी निकलते हैं। तारामंडल ज्याेतिष में राशि कहे जाते हैं।
  • बुध और शुक्र गृह सूर्य के इतने पास हैं कि सूर्य की राेशनी के कारण इन्हें देखा नहीं जा सकता, मंगल गृह पृथ्वी से एक साल दिखाई देता है।


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