शहर के संत रविदास वार्ड में एक कबूतर के मरने से सनसनी फैल गई। पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने इसका सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा है। शहर में किसी पक्षी के मरने का यह पहला मामला है। इसके पहले राहतगढ़ व बीना में काैआ की माैत हाे चुकी है।
दूसरी तरफ बर्ड फ्लू के डर के बीच चिकन व अंडे के शाैकीनाें काे लिए बर्ड फ्लू का डर सताने लगा है। पिछले एक सप्ताह में चिकन व अंडे के डिमांड 40 फीसदी तक घट गई है। मांसाहारियाें का अब मीट-मछली की तरफ रुझान ज्यादा है।
शहर के चिकन व अंडा व्यापारियाें से मिली जानकारी के अनुसार ग्राहकी पहले से काफी कम हाे गई है। रविववार व बुधवार काे भी पहले से आधे ही ग्राहक आ रहे हैं। चिकन व्यापारी हल्लू भाई ने बताया कि रविवार काे पहले 100 ग्राहक आते थे अब 40-50 ही आ रहे हैं।
इसी वजह से चिकन व अंडे के रेट 10 फीसदी तक ही घट गए हैं। जहां चिकन पहले 180 से 200 रुपए किलाे तक बिक रहा था। अब वह 160-170 रुपए किलाे तक बिक रहा है। प्रदेश के बाहर से आने वाले मुर्गे-मुर्गियों के परिवहन पर राेक लगने से जिले के पाॅल्ट्राे फार्माें में भी स्टाॅक सीमित है। शनिवार की दाेपहहर संत रविदास वार्ड में मृत मिले कबूतर पर चाेट के निशान मिले हैं। सैंपल लेने वाली पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने इसकी पुष्टि की है। अहितयात के ताैर पर सैंपल जांच के लिए भेजा गया है।
60-70 डिग्री तापमान पर पकाने से खतरा नहीं
उपसंचालक पशु चिकित्सा विभाग डाॅ. आरपी यादव का कहना है कि चिकिन व अंडे काे 60-70 डिसे तापमान पर पकाने से वायरस का खतरा नहीं रहता। डब्ल्यूएचओ ने भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पाॅल्ट्री फार्माें की सतत निगरानी की जा रही है। जिले में कहीं से भी मुर्गे-मुर्गियाें की माैत की खबर नहीं है। टीमाें काे अलर्ट किया है।
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