सर्दी के सीजन में जिले के सभी ब्लॉकों में स्वस्थ विभाग द्वारा परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत महिलाओं के नसबंदी ऑपरेशन किए जाते हैं। इस बार जिला मुख्यालय के अतिरिक्त नसबंदी कैंप न लगाने के कारण बुधवार को जिले भर की 150 से अधिक महिलाएं अपना ऑपरेशन कराने पहुंच गई। परेशान महिलाएं ऑपरेशन न होने की शिकायत करने कलेक्टोरेट पहुंची पर कुछ नहीं हुआ। आखिरकार 100 से अधिक महिलाएं बिना ऑपरेशन के अपने घर लौट गईं।
जिले में नौगांव, गौरिहार, लवकुशनगर, राजनगर, ईशानगर, बड़ामलहरा, बकस्वाहा और बिजावर ब्लॉक की महिलाएं बुधवार की सुबह जिला अस्पताल स्थित एलटीटी ओटी में आयोजित कैंप में अपना नसबंदी ऑपरेशन कराने पहुंची। महिलाएं अधिक मात्रा में पहुंचने के कारण यहां के स्टाफ ने 30 मरीजों के फार्म जमा किए। जिनके डॉ. गीता चौरसिया ने नसबंदी ऑपरेशन किए।
बांकी की महिलाएं बुधवार की सुबह से बिना खाना खाए दोपहर तक नसबंदी होने का इंतजार करती रहीं। बांकी की महिलाओं को जब अपने ऑपरेशन होते नहीं दिखे तो एकत्र होकर कलेक्टोरेट पहुंची और अपनी समस्या सुनाई। महिलाओं और उनके परिजनों द्वारा कलेक्टोरेट में हंगामा करने की जानकारी लगते ही सीएमएचओ डॉ. सतीश चौबे और सिविल सर्जन डॉ. लखन तिवारी जिला अस्पताल पहुंचे और समझाइश देते हुए मामला शांत कराया।
30 महिलाओं के किए गए ऑपरेशन
जिले में ग्रामीण क्षेत्रों की 150 से अधिक महिलाएं बुधवार की सुबह अपने परिजनों, आशा कार्यकर्ता व एएनएम के साथ अपना फार्म कंप्लीट कर जिला अस्पताल की एलटीटी ओटी में नसबंदी कराने पहुंची। यहां के निर्सिंग स्टाफ ने इनमें से सिर्फ 30 महिलाओं के फार्म जमा कर उनको ओटी के अंदर कर ऑपरेशन किए। बांकी की महिलाएं परिसर में अपना-अपना फर्म लिए सुबह से शाम तक घूमती रहीं। जब कलेक्टर, सीएमएचओ और सिविल सर्जन को समस्या सुनाने के बाद भी बात नहीं बनी तो बिना ऑपरेशन के यह महिलाएं अपने-अपने घर लौट गई।
महिलाएं कई दिनों से हो रही परेशान
गौरिहार की सराेज राजपूत, बड़ामलहरा की गायत्री कुशवाहा और ईशानगर की शोभा यादव ने बताया कि नसबंदी ऑपरेशन कराने वाली महिलाओं को भूखे पेट जिला अस्पताल बुलाया जाता है, ताकि ऑपरेशन के दौरान दर्ज के इंजेक्शन का असर बना रहे। यह महिलाएं सोमवार से प्रतिदिन जिला अस्पताल स्थित एलटीटी ओटी में ऑपरेशन कराने आती हैं, पर कर्मचारियों द्वारा उनके फार्म नहीं लिए जाते इस कारण बिना ऑपरेशन के लौट जाती हैं। महिलाओं ने बताया कि पिछले तीन दिन से भूखे पेट आने के कारण अब तबियत बिगड़ने लगी है। यदि ऐसा ही चलता रहा तो यह महिलाएं नसबंदी ऑपरेशन कराने कैसे आएंगी।
सीधी बात -डॉ. सतीश चौबे, सीएमएचओ छतरपुर
जिले में सर्जन की है कमी
जिले भर की महिलाएं नसबंदी कराने जिला अस्पताल आ रही हैं, क्या ब्लॉक स्तर पर कैंप नहीं लगाए जा रहे?
जिला अस्पताल, बिजावर और बड़ामलहरा में कई दिनों से नसबंदी कैंप लगाकर नसबंदी ऑपरेशन किए जा रहे हैं। पर कैंप एक दिन लगाए जाने के कारण यह महिलाएं जिला अस्पताल पहुंच रही हैं।
स्वस्थ विभाग द्वारा बांकी के 6 ब्लाॅक में नसबंदी कैंप क्यों नहीं लगाए जा रहे?
इन दिनों जिले में सर्जन डॉक्टर की कमी है, इसलिए परेशानी आ रही है। जो सर्जन डॉक्टर विभाग के पास उपलब्ध हैं, उनमें से दो भोपाल ट्रेनिंग पर गए हैं, उसमें से एक बीमार चल रहा है। इनके ड्यूटी पर आते ही काफी हद तक समस्या सुलझ जाएगी। जिले में मौजूद रिटायर्ड सर्जन डॉक्टरों ने कोरोना के चलते ऑपरेशन करने से इनकार कर दिया है।
यानि विभाग के पास इस समस्या का अब कोई हल नहीं है?
हल तो है, पर थोड़ा इंतजार करना होगा। बीमार डॉक्टर जैसे ही स्वस्थ हाेते है और ट्रेनिंग पर गए दो डॉक्टर वापस लौटते हैं, अधिकांश समस्या हल हो जाएगी। अगले माह कोरोना वैक्सीन आने के बाद रिटायर्ड सर्जन डॉक्टर भी ऑपरेशन करना शुरू कर देंगे। इस संबंध में उनसे बात भी हो गई है।
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from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3pkeLh5 December 24, 2020 at 05:04AM https://ift.tt/1PKwoAf



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