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भरण-पोषण न देना पड़े इसलिए पतियों ने गुपचुप बदले ठिकाने; प्राधिकरण में मदद की गुहार

पत्नियों को भरण-पोषण की राशि न देना पड़े, इसके लिए कई पतियों ने ठिकाने बदल लिए। कुछ ने कंपनी बदली, कुछ ने मकान...इस वजह से भरण-पोषण की राशि का भुगतान बंद हो गया। अब महिलाएं कुटुंब न्यायालय और जिला विधिक प्राधिकरण में मदद की गुहार लगा रही हैं। हालांकि प्राधिकरण महिलाओं को कानूनी सहायता उपलब्ध करा रहा है।

कोर्ट ने काउंसलरों को काउंसलिंग करने के निर्देश दिए हैं। प्राधिकरण और कोर्ट में हर दिन 3-4 महिलाएं पहुंच रही हैं। उनकी शिकायत है कि पति ने भरण-पोषण की राशि बंद कर दी। फैमिली कोर्ट की काउंसलर नुरुनिसा खान ने बताया कि उनके पास भरण-पोषण राशि बंद होने के बाद महिलाएं सलाह लेने आ रही हैं। वहीं विधिक प्राधिकरण भी महिलाओं को कानूनी सहायता उपलब्ध करा रहा है।

परेशानी यह भी...कुछ ने कंपनी बदली तो किसी ने कारोबार, पत्नियों को नहीं मिल रहा नए घर का पता
पति ने जॉब छोड़ी तो बंद हो गई भरण-पोषण की राशि
एक महिला ने कोर्ट को दी अर्जी में बताया कि कि भरण-पोषण मामले में कोर्ट के आदेश के बाद पति की सेलरी में से निजी कंपनी भरण-पोषण की राशि भुगतान करती थी। उसने वह राशि बंद कर दी। जब पता किया तो जानकारी मिली, कि पति ने जॉब छोड़ दी है। कंपनी यह जानकारी नहीं दे पा रही कि पति वर्तमान में कहां जॉब कर रहा है। उसने कोर्ट में आदेश के अवमानना का प्रकरण लगाया है।

पति ने छिपाई सेवानिवृत्ति की बात, बदल लिया ठिकाना
महिला ने प्राधिकरण को बताया कि उसके पति का रिटायरमेंट मई में हो गया। अगस्त से उसने राशि डालना बंद कर दिया। जब वह उसके ऑफिस पहुंची तो पता चला कि वह रिटायर हो गया। जब तक उसकी सारी राशि का भुगतान नहीं हुआ तब तक उसने रुपए डाले। महिला को पति के घर का पता नहीं मिल रहा। उसने मकान बदल लिया। महिला ने अब पेंशन से भरण-पोषण की राशि दिलाए जाने के लिए आवेदन दिया है।

कारोबार समेटकर पति ने शिफ्ट कर लिया घर
एक महिला ने आवेदन में बताया कि उसके पति कपड़े का कारोबार करते थे। लाॅकडाउन में उन्होंने भरण-पोषण की राशि नहीं दी। जब वह उनके घर गई तो पता चला वे मकान खाली करके कहीं ओर चले गए हैं। वहीं दुकान भी चौक बाजार से बंद कर दी। वहां के व्यापारियों को नहीं पता वे कहा है। मामले में महिला ने प्राधिकरण में कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए आवेदन दिया है।

यह है प्रावधान-कानून द्वारा व्यवस्था की गई है कि पत्नी यदि पति से अलग रहती है और जब तक पत्नी दूसरा विवाह न कर ले तब तक पति से गुजारा भत्ता,भरण पोषण मांग सकती है। जिसमें पति की हैसियत के बराबर रहन-सहन, खाना खर्चा दिया जाएगा।

हकीकत यह भी...ऐसे हालात में झेलना पड़ती है प्रताड़ना
गौरवी वन स्टॉप क्राइसिस की शिवानी सैनी का कहना है कि इस तरह के लंबित प्रकरणों के कारण महिलाओं को माता-पिता पर निर्भर रहना पड़ता है या फिर ससुराल जाकर प्रताड़ना झेलना पड़ती है।

भरण-पोषण की राशि का भुगतान न होने को लेकर महिलाएं परेशान है। जहां तक संभव हो रहा है महिलाओं को कानूनी सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। - संदीप शर्मा, सचिव, जिला विधिक प्राधिकरण



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प्रतीकात्मक फोटो


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2TLYlR9 November 03, 2020 at 05:12AM https://ift.tt/1PKwoAf

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