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क्यूआर कोड से कर सकेंगे ग्रीन पटाखों की पहचान, इनसे 30% तक कम प्रदूषण; अधिकतम 125 डेसीबल तक के पटाखे बिकेंगे

कोरोना संक्रमण को देखते हुए पटाखा दुकान का लाइसेंस लेने वालों को कहा यह सुनिश्चित करना होगा कि दुकान पर और बाजार में भीड़ इकट्‌ठा न हो। पटाखा व्यापारियों के साथ सोमवार को बैठक में कलेक्टर अविनाश लवानिया ने कहा कि थोक व्यापारी पटाखे खुले में न रखें। उन्होंने 125 डेसीबल तक की आवाज वाले ही पटाखे बेचने को भी कहा। बैठक में बताया गया कि बिट्‌टन मार्केट दशहरा मैदान, बंजारी दशहरा मैदान कोलार और होशंगाबाद रोड पर फुटकर पटाखा बाजार के लिए लाइसेंस दिए जाएंगे।

यह है खासियत... सिर्फ सफेद और पीली रोशनी ही देंगे
ग्रीन पटाखों में बेरियम नाइट्रेट का इस्तेमाल नहीं होता है। इसके अलावा एल्युमिनियम की मात्रा भी काफी कम रखी जाती है और राख का इस्तेमाल भी इनमें नहीं किया जाता है। जिसकी वजह से इन पटाखों ने से पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा में 30 से 35 प्रतिशत की गिरावट आने का दावा किया जाता है। लेकिन यह पटाखे सामान्य पटाखों की तुलना में थोड़े महंगे होते हैं । कई केमिकल का इस्तेमाल न होने की वजह से ग्रीन पटाखे में सिर्फ सफेद और पीली रोशनी ही देंगे।

दो साल से दिल्ली में केवल ग्रीन पटाखों के ही उपयोग की अनुमति
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए पिछले दो साल से दिल्ली में केवल ग्रीन पटाखों के ही उपयोग की अनुमति है। यह पटाखे अब देश के अन्य शहरों में भी उपलब्ध हैं। बैठक में बताया गया कि भोपाल के बाजार में ग्रीन पटाखे उपलब्ध हैं। इन्हें क्यूआर कोड से पहचाना जा सकता है। क्यूआर कोड को स्कैन करके यह भी पता लगाया जा सकता है कि पटाखा किस कंपनी में बना है।



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QR code will be able to identify green firecrackers, reduce pollution by 30%; Crackers up to 125 decibels will be sold


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