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आंध्र-कर्नाटक में हैं 12 से 15 टेक्सटाइल पार्क, मप्र में सिर्फ बुरहानपुर में ही सुविधा

खरगोन के आसपास मेगा फूड पार्क के लिए प्रस्ताव बनाया जाना चाहिए। जामली व पीपरखेड़ा के पास काफी सरकारी जमीन है। यहां इसे स्थापित किया जा सकता है। यहां फूड पार्क बन जाने से किसानों व व्यापारियों के लिए अच्छे अवसर हो सकते हैं। जिले में टेक्सटाइल उद्योग की भी पूरी संभावनाएं हैं, लेकिन उस दिशा में ज्यादा काम नहीं हुआ।
गुरुवार को जिला मुख्यालय पर जिलास्तरीय लघु संवर्धन बोर्ड की बैठक में जिले के विकास में उद्योगों की भूमिका और रोजगार के अवसर पर चर्चा हुई। इसमें चेंबर ऑफ कॉमर्स अध्यक्ष कैलाश अग्रवाल ने यह मांग उठाई। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव बनाकर केंद्र तक भिजवाना चाहिए। कपास उत्पादक आंध्रप्रदेश व कर्नाटक राज्यों में 12-15 टेक्सटाइल पार्क हैं। मध्य प्रदेश में केवल बुरहानपुर में ही एकमात्र टेक्सटाईल पार्क है। जबकि खरगोन में प्रदेश का सबसे ज्यादा कपास का उत्पादन होता है। केंद्र से 70 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है। इससे उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। यहां एक ही जगह एकसाथ 200 एकड़ जमीन चिह्नित कर सुविधाएं जुटाकर कपास क्लस्टर विकसित कर रोजगार दिलाया जा सकता है। बैठक में एमपीआईडी के महाप्रबंधक राजेश भारती, संयुक्त कलेक्टर नेहा शिवहरे, कृषि उप संचालक एमएल चौहान, एलडीएम संदीप मुरूड़कर सहित उद्योगपतियों में बसंत अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।
मेंटेनेंस शुल्क पर डायरेक्टर बोले- औद्योगिक संघ तय कर सकते हैं
मेंटनेंस शुल्क लगने की बात पर इंदौर के एमपीआईडीसी के कार्यकारी संचालक एचआर मुजाल्दा ने उद्योगपतियों से कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में लगने वाला संधारण शुल्क वहां स्थापित औद्योगिक संघ के पदाधिकारी ही तय कर सकते हैं। यहां संधारित या आवश्यक व्यवस्थाओं संबंधित इस शुल्क को जीएमडीआईसी के खाते में जमा कराई जा सकती है। वहीं संघ क्षेत्र के लिए प्रस्ताव भी बनाकर दे सकते हैं। देवास में फिलहाल इसी तरह पैटर्न शुरू हुआ है, जिसमें संबंधित औद्योगिक क्षेत्र में काम के लिए प्रस्ताव के आधार पर शासन भी राशि उपलब्ध कराती है।

हर माह श्रम निरीक्षक प्रस्तुत करेंगे रिपोर्ट
कलेक्टर अनुग्रह पी ने श्रम विभाग की समीक्षा करते हुए मौजूद 7 श्रम निरीक्षकों को कहा कि हर माह संबल योजना में पंजीकृत श्रमिकों के वास्तविक पात्रता के संबंध में 10-10 गांव का वेरीफिकेशन निरंतर करते रहे, जिसकी रिपोर्ट दें। व विभिन्न अधिनियमों की कार्रवाई प्रस्तुत करें। श्रम पदाधिकारी शैलेंद्रसिंह सोलंकी ने बताया कि जिले में संबल योजना में 4 लाख 76 हजार 562 श्रमिक पंजीकृत है। वर्ष 2018 से नवंबर 2020 तक अनुग्रह सहायता (सामान्य मृत्यु) के रूप में 3106 हितग्राहियों को 62.12 करोड़ रुपए और अनुग्रह सहायता (दुर्घटना मृत्यु) के रूप में 421 प्रभावितों को 16.84 करोड़ रुपए उपलब्ध कराए। औद्योगिक विवाद अधिनियम में इस साल कुल 12 प्रकरण दर्ज किए हैं। इसी तरह उपादान भुगतान अधिनियम 19 प्रकरणों में से 8 में 28350 का भुगतान कराया गया। 7 श्रम निरीक्षक उपस्थित रहे।

शुल्क, रिफायनरी, स्क्रैप सब्सिडी व अतिक्रमण की उठाई बात

01 कपास उत्पादक क्षेत्र में 1 रिफायनरी ऑइल इंडस्ट्री नहीं है। कम से कम एक की अनुमति मिलना चाहिए।

02 सरकार स्क्रैप हटाना चाहती है। लोहा, प्लास्टिक, पेपर रिसाइक्लिंग उद्योग पर 100% सब्सिडी दें।

03 उद्योगों के आसपास पानी, बिजली नहीं है। अतिक्रमण भी है। यह समस्या दूर होना चािहए।

जानिए... 5 औद्योगिक क्षेत्र में 247 व 131 इकाइयां हैं बाहर
महाप्रबंधक एसएस मंडलोई ने बताया जिले में 5 औद्योगिक क्षेत्र निमरानी, सिरलाय रोड बड़वाह, खरगोन में भाडली, औरंगपुरा व औद्योगिक क्षेत्र भीकनगांव स्थापित है। इसके अलावा जिले में सेगांव, महेश्वर में मातमूर और सनावद में औद्योगिक क्षेत्र प्रस्तावित है। औद्योगिक क्षेत्र में 247 व औद्योगिक क्षेत्रों के बाहर 131 औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं। पूरे जिले में 21 बड़े उद्योग है। जिले से कॉटन बेल्स, कॉटन व यार्न, सब मर्सिबल पंपस व मोटर्स, चिकपीज, पीपीबैग, पीपी वोवेन बैग, फैबरिक व जंबो बैग्ज आदि जर्मन, स्वीजरलैंड, इजराईल, फ्रांस जैसे यूरोपिय देशों में निर्यात की जाती है।




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There are 12 to 15 textile parks in Andhra-Karnataka, only in Burhanpur in MP


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